अर्चना तो अगले दिन सुबह सुबह ही जन्मभूमि चली गयी , चारो तरफ कोहरे के एक चादर तानी थी, ठंडी ठंडी हवाए चल रही थी , पर उसे कौन रोक सकता है |
वह से हम लोग वृन्दावन के लिए चले | सबसे पहले रंगनाथ भगवन के मंदिर ही पहुचे थे , वही गाडी पार्क कर दी थी और दर्शन किये , फिर बांके बिहारी जी के दर्शन , पहली बार कम भीड़ में दर्शन किये , वरना वह हमेशा बहुत भीड़ रहती है |
उसके बाद राधा बल्लभ , वह कशिश की चप्पल कोई ले गया , उसके बाद निधि बन |
फिर रंग्नाथ्जी के मंदिर , फिर दोपहर का खाना और उसके बाद अगरवाल भवन जो अंग्रेजो के मंदिर के पास है वहा आराम |
शाम को वेश्नो देवी मंदिर तथा प्रेम मंदिर , जो देखने लायक है |
प्रेम मंदिर अपनी रंग बदलती हुई लाइट के लिए फेमस है | वह मंदिर का रंग बदलता रहता है | वह बहुत विशाल झाकिया है जो बिलकुल जीवित लगती है |
कृष्णा भगवन , गोवेर्धन पर्वत उठा रहे है , बहुत अच्छी झाकी है |
प्रेम मंदिर में जमीन बहुत ठंडी हो रही थी , पैर नहीं रखा जा रहा था , पर वह घूमने में मजा आ रहा था | वेश्नो देवी मंदिर में कैमरा ले जाने की अनुमति नहीं है |
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