Friday, 5 July 2013

05/07/2013...Councelling

आज से काउंसलिंग शरू हो गयी है ..कॉलेज में आज से Entrance Exam की काउंसलिंग स्टार्ट हो गयी है पर आज लॉग इन नहीं हो पाया है ..उम्मीद है कल हो जाएगा ..अब एक महिना busy रहना है ..रविबार को भी काउंसलिंग होनी है .. बच्चो के स्कूल कल से खुल गए है ..और बच्चे स्कूल जा रहे है ..मम्मी आज रात में अहेम्दाबाद जा रही है ..राजू भाई के पास .., इस बार पाल साहब का भी transfer हो गया बरेली .. उनके साथ अच्छा समय गुजरा था ..,दीपिका दीपू को मैंने पडाया है ..उनकी याद हमेशा रहेगी ..

Wednesday, 3 July 2013

शादी की सालगिरह -- १० साल का सफर

सोचो जानम..

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सोचो मेरा साथ
और कुछ सपने देखो
आँगन सोचो, जिसमें तुलसी का पौधा हो
जिसके आगे दीप जला कर
सूरज को तुम जगा रही हो
और ज़ुल्फ का सारा सावन
मेरे चेहरे पर बरसा कर कहा करोगी
चलो उठो ‘जी’, सुबह हो गयी
और चाय की प्याली मेरे सिरहाने रख
मेरे बिलकुल पास बैठ कर
कोई एसी चुहल करोगी
कि बरबस ही आँखें खोलूं
भरी भोर में चाँद देख लूँ...

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सोचो जानम
भारी कोई बनारस वाली साडी पहने
और गाल तक झूम रहे कानों के गहने
और कोहनियों तक काँच की चूडी पहने
छम छम की पाजेब पहन कर, दबे पाँव तुम
आ कर मेरी पलकें ढाँपे यह पूछोगी
बतलाओ कैसी लगती हूँ?
और तुम्हारी बाँह थाम कर आँखों का आईना दूँगा
तुम शरमा कर दूर हटोगी
और हाँथ की कोई चूडी, मेरे हाँथों से टकरा कर
टूटेगी और गिर जायेगी
अब कि आँखों में ढेर सा गुस्सा भर कर
तुम जो मेरी आँखों में देखोगी
छुई-मुई सी हो जाओगी...

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और कमर में साडी का ही पल्लू खोंचे
बेलन हाँथों में ले कर
मुझे रसोई ना आने की कडी नसीहत दे कर
तुम आँटे को थाली में डालोगी
मैं तुम्हे परेशां करने की नीयत रख कर
एक हाँथ से कमर तुम्हारी थाम
आँटे में पानी इतना डाल दूंगा, गीला हो जायेगा
मुझसे छूटने की नाकाम कोशिश कर
पानी में और आँटा डाल लेई बना लोगी
और चकले पर रख कर उसे
उस पर बेलन रख कर
और बेलन पर अपने हाँथ रख
उन हाँथों पर मेरा हाँथ पा कर भी
बेलोगी कि रोटी बन ही जाये
दिल बन जायेगा..

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मेरी बेतरतीब चीजें सवाँर कर
और फिर फिर उसे बेतरतीब ही पा कर
झल्लाओगी
बडी बडी आँखें इस तरह दिखाओगी
कि बस अब काट ही खाओगी
मुझे दफ्तर भेज कर ही तुम्हें चैन आया करेगा
और शाम तुम्हारी बेकरार आँखें
बिलकुल दरवाजे पर होंगी
मेरे आते ही लड पडोगी रोज़ रोज़
कि देर से घर आना कोई अच्छी बात नहीं है
मैं चाय पी चुकने तक
सुनूंगा तुम्हारी सारी बक-बक
और फिर/तुम्हारे चुप के लिये
तुम्हें अपने करीब खींच कर
होठ सी दूंगा..

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सपनों से मत भागो चाँद
अंतहीन तुम सपने देखो
आओ जी लें एक ज़िन्दगी
सपनों में ही दुनियाँ कर लें
तुम मेरी आँखों में बैठो
खो जायें हम अंतहीन में...