करोली देवी आप की सदा ही जय | आप के दर्शन की कितनी इच्छा थी कब से लिकिन जा नहीं पा रहा था , इस बार परोजन के बाद जाना हो ही गया , वो भी बहुत ही अच्छी तरीके से , आप चाहे तो क्या नहीं कर सकते , परोजन कितनी अच्छी तरीके से हो गया , सब लोगो का आपस में मिलना हो गया , करोली हम १७ की रात में गए थे , रात को जाने का कुछ लोगो का मन नहीं था , पर समय भी देखना था , हम लोगो को भी मोरादाबाद लोटने की जल्दी थी , अमित ने दो गाडिया करी थी , उस दिन हम लोग फंक्सन में भी गए थे , मोंटी के बेटे के कुआ पूजन में , वह से लोटे और फिर करोली , चाची भी साथ गयी थी …..
लग रहा है न दो सहेलिया खड़ी है , चाची और मम्मी दोनों एक दूसरे का साथ देती रहती है और कई जगह घूम आई है |
जब हम लोग करोली पहुचे तो गेस्ट हाउस में जगह नहीं मिली , फिर गाडी वाले ने दूसरी जगह बताई, नाम याद नहीं आ रहा , वह एक ही कमरे में रुके थे , और सुबह जो नहाये है सभी लोग, हमेशा याद रहेगा , आधे घंटे में सभी नहा लिए थे , किसी ने कह दिया था की दर्शन जल्दी करने होंगे , सभी लोग जल्दी जल्दी नहाकर तैयार थे , गरम पानी के एक बाल्टी १० रुपए में …..
शोर्य अपने पापा के साथ |
माँ की शक्ति होती है जो आपको अपने आप अपने पास बुला लेती है |
दर्शन बहुत अच्छी तरह से हो गए थे , कुछ लोग तो दो बार भी दरसन कर आये थे |
जय माता दी | पहली बार जब दरसन करने गए थे तब तो थोड़ी भीड़ थी पर बाद में वो भी नहीं रही थी ,वह एक रुपए में फूलो की माला मिल रही थी पर वो बात नहीं करते है |
मैं कहा हूँ ….
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