Thursday, 14 April 2016

करोली यात्रा ..यश मुंडन संस्कार

एक बार फिर से करौली जाने का अबसर मिला | अर्चना के भाई योगेश के बेटे यात्विक के मुंडन संस्कार में शामिल होने के लिए  | मुरादाबाद से आगरा की यात्रा ट्रेन से की 5 अप्रैल को | और ६ को हम आगरा में थे , पहले मुझे 7 को आगरा आना था पर करौली जाने का प्रोग्राम एक दिन पहले का हो गया तो आना पड़ा |

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ये ही है यात्विक | आगरा में एक पुराने दोस्त से भी मिलने का प्रोग्राम था पर उससे मुलाकात हो नहीं पायी | तो 7 को हम सुबह तवेरा से करोली के लिए निकले | लगभग २५० किलोमीटर  होगा सफ़र | आगरा से भरतपुर होते हुए हिंदोंन और फिर करौली |

Kaila Devi Temple Karauli

ये हमारी कुलदेवी है | बचपन से जाते रहे है यहाँ | बहुत श्रधा है लोगो की यहाँ .. पैदल ही लोगो का समूह अनेको किलोमीटर दूर से दिखाई देना शरू हो गया था | बहुत गर्मी हो रही थी पर भक्तो की भक्ति में कोई कमी नहीं थी |माना जाता है कि भगवान कृष्ण के पिता वासुदेव और देवकी को जेल में डालकर जिस कन्या योगमाया का वध कंस ने करना चाहा था, वह योगमाया कैला देवी के रूप में इस मंदिर में विराजमान है।

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ये फोटो सफ़र के दौरान की है |

यात्विक अपनी मम्मी और बुआ के साथ |

करौली बाज़ार .. यहाँ हमेशा मेले का माहोल रहता है | खिलोने वाले.. सामान बेचने वाले .. खोया पाया केंद्र |

करौली जिले में एक और मंदिर है श्री मदन मोहन जी का मंदिर |

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मदन मोहनजी मंदिर करौली किले के अन्दर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण महाराजा गोपाल सिंह ने करवाया था जिन्होंने इस मंदिर को मदन मोहनजी जो भगवान कृष्ण के एक रूप है को समर्पित किया था । इस मंदिर में भगवान कृष्ण और देवी राधा की 2 मूर्तियाँ है जो 3 और 2 फीट उंची हैं । लोगों का मानना है की दौलताबाद को जीतने के बाद एक बार महाराजा गोपाल सिंह ने भगवान श्री कृष्ण को अपने सपने में देखा जिन्होंने राजा को अपना मंदिर बनवाने का निर्देश दिया था  राजा  ने निर्देश का पालन करते हुए अजमेर से भगवान की मूर्ति मंगवाई और उसे यहाँ स्थापित कराया।

हम दोनों ने शाम को मदन मोहन जी के मंदिर की यात्रा करी और दर्शन किया |

अगले दिन फिर माता के दर्शन करके हम लोग आगरा लौटे , रस्ते में अंजनी पर्वत पर गए |

अर्चना अपने छोटे भाई के साथ |

करौली से आगरा आने का एक रास्ता धोलपुर होते हुए भी है .. हम उसी रस्ते से बापस आये | नया रोड था ..हम एक घंटे जल्दी आ गए |

किसी को कुछ देने में हमारा दिल खुश होता है | अर्चना कभी किसी को मना नहीं करती | जब हम गन्ने का जूस पी रहे थे तो एक बच्चे ने आकर पैसे मांगे तो हमने उसे एक गिलास दिलवा दिया .. फिर एक और बच्चा आ गया , मैंने मना किया पर अर्चना ने उसे भी जूस का गिलास दिलवाया | फिर जब हम लौटने में रस्ते में ताश्ता कर रहे थे तो एक बच्चा फिर मांगने आया .. अर्चना ने उसे भी खाने को दिलवाया | जब हम बस से मुरादाबाद लौट रहे थे तो एक आदमी १० रुपए में सर्फ़ बेच रहा था .. अर्चना ने उसे १० रपे दे कर कहा की सर्फ़  किसी को इसे ही दे देना तुम रुपए रख लो | जब हम मदन मोहन मंदिर से लौट रहे थे तो भोग रखने के लिए एक दूकानदार से थैली मांगी , अर्चना ने उसे २ रुपए देने चाहे पर उसने लेने से मना कर दिया तो अर्चना ने उससे ३० रुपए का चन्दन खरीद लिया | ये अर्चना की अच्छी आदत है |

Friday, 1 April 2016

बच्चो का रिजल्ट

28 मार्च २०१६ को दोनों बच्चो का रिजल्ट आ गया | दोनों ही पास हो गए | पूर्वे के 97 . 8 % और कौस्तुभ के 96.7 % मार्क्स आये | अब पूर्वी 5 th में और कौस्तुभ 4 th में आ गया | 4 अप्रैल से द्वारा उनके स्कूल खुल रहे है | और उन दोनों की किताबे आ चुकी है |

समय तेजी से आगे बढ़ता जाता है , पहले हम पढ़ते थे , अब बच्चे पढ़ रहे है , दो तीन साल बाद एकदम बड़े लगने लगेंगे बच्चे | पर हमें वो हमेशा छोटे ही लगेंगे |

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ये पूर्वी के पहले स्कूल का फोटो है |

जेल यात्रा

अरे……. , क्या सोचने लगे .. मैं जेल एग्जाम लेने गया था | राजकीय पॉलिटेक्निक बिजनोर में जिला कारागार के अन्दर computer सम्बंधित प्रशिक्षण कैदियों को दिया जा रहा था , उससे सम्बंधित परीक्षा लेने के लिए मुझे नियुक्त किया गया था | कल 31 मार्च २०१६ को मैं परीक्षा लेने हेतु बिजनोर गया था , वहा से मुझे जिला कारागार ले जाया गया | मोबाइल कारागार में प्रवेशित नहीं होता है | पहचान ले लिए हाथ पर हस्ताक्षर किया गए |

जेल में हरियाली खूब थी.. बहुत सारे फूलो के पोधे लगे थे |और सामने एक बहुत सुन्दर शिवजी भगवान का मंदिर था | भगवान् सबको चाहिए , पाप करने वालो को ज्यादा | मंदिर देख कर मन खुश हो गया |

जेलर साहिब ने चाय ,नाश्ता कराया | उनसे देश , समाज के बारे में बात होती रही | उन्होंने एक विचार रखा की यदि स्कूल की शिक्षा सभी के लिए फ्री कर दी जाये किताबो  सहित , और जब बच्चा अपनी व्यावसायिक जिंदगी में प्रवेश करे तो अपनी आमदनी का १% उस स्कूल को दे , जिससे आने वाले बच्चे फ्री पढ़ सके |

और भी बहुत सारी बाते होती रही | फिर मैंने एग्जाम लिया सभी कैदी सामान्य कपडे पहने हुए थे | वो जेल में घूम रहे थे | जेल में कैंटीन भी थी | मेरे लिए वो छात्र थे और मैंने उनसे छात्रो जैसा ही बर्ताव किया | वहा भी गरीबी और अमीरी थे | छात्रो को कम्पुटर का ज्ञान था |

एक अलग अनुभव था |शाम को बापस घर पर था |