पिछले महीने दिसम्बर के अंत में हिमकर जी के साथ मथुरा वृन्दावन का प्रोग्राम बन गया , लग रहा था ठण्ड बहुत है ,पर मौसम अच्छा था वह पर , और सभी दर्शन बहुत अच्छी तरेह से हुए |
अकेले घूमने से किसी के साथ घूमने का ज्यादा मजा है , ये बात भी सीखने को मिली |
कौस्तुभ तो शैतानी करता ही है पर कशिश अपना सहयोग करती है | रास्ते में तीनो बच्चे आगे बैठने के लिए आग्रह करते रहे | परी हिमकर जी की बेटी है |
गांधीजी के तीन बंदर , बुरा न देखो , बुरा न सुनो , बुरा न कहो | रंगनाथ भगवन के मंदिर में |
यारियां | अच्छी मूवी है |
जमुना किनारे बच्चो के साथ | रेता में |
सबसे पहले हम लोग मथुरा गए थे | बिलकुल जन्मभूमि के सामने रुके थे | जन्मभूमि में दर्शन बहुत अच्छे हुए थे |
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