Friday, 1 April 2016

जेल यात्रा

अरे……. , क्या सोचने लगे .. मैं जेल एग्जाम लेने गया था | राजकीय पॉलिटेक्निक बिजनोर में जिला कारागार के अन्दर computer सम्बंधित प्रशिक्षण कैदियों को दिया जा रहा था , उससे सम्बंधित परीक्षा लेने के लिए मुझे नियुक्त किया गया था | कल 31 मार्च २०१६ को मैं परीक्षा लेने हेतु बिजनोर गया था , वहा से मुझे जिला कारागार ले जाया गया | मोबाइल कारागार में प्रवेशित नहीं होता है | पहचान ले लिए हाथ पर हस्ताक्षर किया गए |

जेल में हरियाली खूब थी.. बहुत सारे फूलो के पोधे लगे थे |और सामने एक बहुत सुन्दर शिवजी भगवान का मंदिर था | भगवान् सबको चाहिए , पाप करने वालो को ज्यादा | मंदिर देख कर मन खुश हो गया |

जेलर साहिब ने चाय ,नाश्ता कराया | उनसे देश , समाज के बारे में बात होती रही | उन्होंने एक विचार रखा की यदि स्कूल की शिक्षा सभी के लिए फ्री कर दी जाये किताबो  सहित , और जब बच्चा अपनी व्यावसायिक जिंदगी में प्रवेश करे तो अपनी आमदनी का १% उस स्कूल को दे , जिससे आने वाले बच्चे फ्री पढ़ सके |

और भी बहुत सारी बाते होती रही | फिर मैंने एग्जाम लिया सभी कैदी सामान्य कपडे पहने हुए थे | वो जेल में घूम रहे थे | जेल में कैंटीन भी थी | मेरे लिए वो छात्र थे और मैंने उनसे छात्रो जैसा ही बर्ताव किया | वहा भी गरीबी और अमीरी थे | छात्रो को कम्पुटर का ज्ञान था |

एक अलग अनुभव था |शाम को बापस घर पर था |

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