Friday, 17 August 2012

18 August 2012 -- My Independence speech in college



परम पूजनीय राष्टीय धवज एवं यहाँ उपस्थिति सभी भारतवासी, स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मैं आप सभी का हार्दिक अभिनंदन करता हूँ |
आज का दिन प्रतीक है बलिदान का, बलिदानियो के सम्मान का
हमारे पुर्बजो के आन का और इस देश की शान का
दो पंक्तिया इस प्रकार है -
रावन का वध बिना राम के बनवास के सम्बभ नहीं था
और यकीं मानिये दोस्तों ये सतंत्र भारत बिना भगत, सुभाष, गाँधी के सम्भब नहीं था |

इस देश के मेहमानों को भगवान समझा जाता है, हमने भी अंग्रेजो को मेहमान समझ कर पनाह दी , मगर क्या पता था को वो व्यापारी के भेष मैं हेवान बनकर आये है , धीरे धीरे विदेशी हुकूमत ने हमारे राष्ट्र पर कब्ज़ा कर लिया , हमारे साथ पशुओं से भी ज्यादा बुरा ब्यबहार किया जाने लगा | जलियाँवाला नर्सहार अब आम हो गया था , जानते है क्यों, क्युकी ये देश अब गुलाम हो गया था | कुछ बलिदानियो ने भारत माँ को गुलामी की जंजीरों के मुक्त करने का बीड़ा उठाया , ये देश से बेपनाह मोहब्बत करने वाले दीवाने थे , ये देश के लिए सूली पर चड जाने वाले दीवाने थे | हम ॠणी रहेंगे उन उन दीवानों के जिन्होंने देश के लिए हँसते हँसते सावत्र न्युछाबर कर दिया |
" हमारी हंसी के लिए उन्होंने अपनी खुशी कुर्बान् कर दी ,
इस सरजमी के लिए उन्होंने अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी |"

15 अगस्त 1947 , हमारा देश भारत आजाद हुआ, आजादी के कुछ सालो बाद हमने अपना संबिधान बना लिया, आज हमारा देश एक बना हुआ है इसका पूरा श्रेय हमारे संबिधान को जाता है | आजादी के बाद हमारे अन्दाता किसानो ने जी तोड़ मेहनत की इसी कारण कृषि के क्षेत्र में क्रांति सी आ गयी , जिसे हरित क्रांति के नाम से जाना गया |

आजादी के बाद भी हमपर कई विदेशी आकर्मण हुए , हमारे जवानो ने उनका डट कर सामना किया,
"हमें भरत सुभाष गाँधी का वो जमाना याद है,
वो तेरा देश पर हँसते हँसते कुर्बान होना याद है. |

इन बिषम परिस्थितियों के बाबजूद भारत बिज्ञान एवं तकनीकी के क्षेत्र में लगातार विकास करता रहा |
आज मेरा हिर्दय बार बार इन पंक्तियों को दोहराने का कर रहा है ...
" जय जवान जय किसान जय जय बिज्ञान जय संबिधान |

पर कही न कही हमें ये सवाल परेशान करता रहता है - क्या हम अपने सवतंत्रता सेनानियों की शहादत का सही सम्मान कर रहे है  क्या सचमुच सब सही हो रहा है ये सवाल हम एक दूसरे से पूछने से पूछने की बजाय खुद से पूछे तो बेहतर जवाब मिलेगा |
भ्रष्टाचार कम होने के बजाय लगातार बड रहा है , लाखो लोग आज भी भूखे सोते है हजारों लोग भूख से मर जाते है , बच्चे जिन्हें स्कूल जाना चाहिए काम कर जा रहे है , आज हमारी इच्छाये इतनी बड गयी है , दोस्तों कुछ रूककर सोचने का समय ही नहीं है हमारे पास | आज स्वार्थ देश प्रेम पर इस कदर भारी है की न् जनता को घोटालो से मतलब है न नेता को देश सेवा प्यारी है , और अब क्या जरूरत है इतनी विदेशी आकर्मण की जब आपस में ही इतनी मारा मारी है|
बड़े बड़े वादे किये जाते है कितने पूरे किये जाते है किसी से छिपा नहीं है | यहाँ तो रक्षक ही भक्षक बने बैठे है | आज सभी को बड़ा आदमी बनना है चाहे तरीका कुछ भी हो
"तैरने के लिए पानी का होने जरुरी है
और बड़ा आदमी बन्ने के लिए पहले आदमी बनना जरूरी है " |
अगर वाकी दुनिया गलत कर रही है तो जाहिर सी बात है की सही कामो को बेबकूफी समझा जायेगा पर इसका मतलब यह तो नहीं है की मई भी गलत हो जाऊ |
आज जरूरत है हमें प्रेरणा लेने की उन दीवानों से , उन वीरो से उन वीरांगनाओ से जिन्होंने अपना स्वत्र निछावर इस देश पर कर दिया  की आने वाली पीढी इस देश को सपनो से भी प्यारा बनाये |
" घनघोर अँधेरा भी सूर्योदय के बाद ज्योति मई बदल जाता है
और एक लुटेरा भी आत्ममंथन के बाद रामायण रचियता मई बदल जाता है |".
समाज से बुराइयो को समाप्त करने के लिए आत्ममंथन की जरूरत है, आत्म विवेचना की जरूरत है | आसमान के नीचे लहराते इस तिरंगे के नीचे आइये हम सपथ ले की हम इस देश को सपनो से भी प्यारा बनायेंगे, पूरे संसार के सामने हम भारत को एक उन्नत राष्ट् बनायेंगे|
जय हिंद जय भारत |

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